🌱 वर्मी कम्पोस्ट से आम की खेती

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परिचय

भारत में आम को "फलों का राजा" कहा जाता है। आम की खेती में वर्मी कम्पोस्ट का प्रयोग मिट्टी की उर्वरता, पेड़ की सेहत और फलों की गुणवत्ता को बढ़ाता है, जिससे बड़े, मीठे और अधिक टिकाऊ आम मिलते हैं।

Mango Farming

आम में वर्मी कम्पोस्ट के फायदे

वर्मी कम्पोस्ट कब और कैसे डालें

  1. रोपण के समय: नए आम के पौधे लगाते समय लगभग 1m × 1m × 1m का गड्ढा खोदें और उसमें 8–10 किलो वर्मी कम्पोस्ट मिलाकर पौधा लगाएँ।
  2. छोटे पौधे (1–5 वर्ष): प्रति पेड़ 5–10 किलो वर्मी कम्पोस्ट साल में दो बार डालें – एक बार वर्षा से पहले और एक बार फल तुड़ाई के बाद।
  3. बड़े पेड़ (6 वर्ष से अधिक): प्रति पेड़ 25–50 किलो वर्मी कम्पोस्ट साल में दो बार डालें – फूल आने से पहले (जनवरी–फरवरी) और फल तुड़ाई के बाद (जुलाई–अगस्त)। इसे पेड़ की छाया की परिधि पर डालकर हल्की मिट्टी से मिला दें।

आम बाग की देखभाल समयसारणी

चरण समय मुख्य कार्य
रोपण जुलाई–अगस्त (मानसून) ग्राफ्टेड पौधे लगाएँ; गड्ढों में वर्मी कम्पोस्ट मिलाएँ
वनस्पतिक वृद्धि पहले 3 वर्ष सिंचाई, मल्चिंग और साल में दो बार वर्मी कम्पोस्ट डालें
फूल आना जनवरी–फरवरी फूल और फल सेट के लिए वर्मी कम्पोस्ट डालें
कटाई अप्रैल–जून फलों को पकने पर तोड़ें; पेड़ पर ज्यादा देर न छोड़ें

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न – आम खेती में वर्मी कम्पोस्ट

प्र: क्या वर्मी कम्पोस्ट से रासायनिक उर्वरक की जरूरत नहीं रहती?
उ: हाँ, वर्मी कम्पोस्ट मिट्टी को पर्याप्त पोषण देता है और रासायनिक उर्वरक की आवश्यकता नहीं रहती।

प्र: वर्मी कम्पोस्ट कितनी बार डालना चाहिए?
उ: कम से कम साल में दो बार – वर्षा से पहले और फल तुड़ाई के बाद।

प्र: क्या इससे फलों की गुणवत्ता बढ़ती है?
उ: बिल्कुल। फल ज्यादा मीठे, बड़े और टिकाऊ हो जाते हैं।

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